विजय सिंह पथिक ने टोडगढ़ किले से भागकर ओछड़ी चित्तौड़ मे शिक्षा का प्रसार कार्य प्रारम्भ, हरिभाऊ किंकर द्वारा संचालित ‘विध्या प्रचारणी सभा’ से जुड़े
विध्या प्रचारणी सभा के बैठक मे बिजोल्या से आए साधू सीताराम दास से परिचय, उनके व्यक्तित्व व साहस को देख साधू सीताराम दास ने उनसे उन्हे बिजोल्या चल ‘बिजोल्या किसान आन्दोलन’ का नेतृत्व करने का आग्रह किया
1916: बिजोल्या मे बिजोल्या किसान आन्दोलन का नेतृत्व किया
1917: बिजोल्या मे उपरमाल पाँच बोर्ड के स्थापना व शिक्षा प्रसार हेतु पाठशाला की स्थापना
मेवाड़ रियासत द्वारा किसानो पर 80 प्रकार के लगाए टैक्स/करों व बेगार के खिलाफ किसान सत्याग्रह किया। किसानों ने वर्षों तक खेतों को नहीं जोता और टैक्स/करों को देने से मना किया
1918; महात्मा गाँधी ने बिजोल्या किसान आन्दोलन की जानकारी लेने हेतु अपने सचिव महादेव देसाई को बिजोल्या भेजा
पथिक जी से प्रभावित होकर माणिक्य लाल वर्मा ने जमीदार ठिकाने की नौकरी से त्यागपत्र देकर आन्दोलन से जुड़े
पथिक जी ने श्री गणेश शंकर विध्यार्थी जी को किसानों के ओर से राखी भेजी। ‘प्रताप अखबार’ के द्वारा बिजोल्या किसान आन्दोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित किया
1919: काँग्रेस के अमृतसर अधिवेशन मे देशी राजाओं के शोषण व किसानों की समस्याओं पर बल गंगाधर तिलक से प्रस्ताव रखवाया
1920: काँग्रेस के नागपुर अधिवेशन मे बिजोल्या के किसानों की समस्याओं पर प्रस्ताव
1920: गाँधी जी के अनुरोध पर वर्धा पहुँचे, सेठ जमना लाल बजाज के आर्थिक सहयाग से राजस्थान केसरी अखबार का सम्पादन किया
1921: सेठ जमना लाल बजाज से मतभेद के बाद अजमेर आये और ‘राजस्थान सेवा संघ’ की नीव डाली शिक्षा, स्वछता, नशा-बन्दी का प्रचार प्रसार
‘नवीन राजस्थान’ समाचारपत्र का प्रकाशन शुरू किया, राजाओं के शोषण के खिलाफ लिखा
5 फरवरी 1922: आन्दोलन के दबाव मे ए0जी0जी0 हालैंड के नेतृत्व मे सन्धि मे किसानों पर लाग्ने वाले 35 प्रकार के टैक्स/करों को माफ किया गया, किसानों पर लगे मुकदमे वापस लिए गये और किसानों की जब्त जमीन वापस की गई
बिजोल्या आन्दोलन के बाद सिरोही भील आन्दोलन, बेगु आदिवासी आन्दोलन के दौरान गिरफ्तार हुए। 05 वर्ष (1923 से 1927) उदयपुर जेल मे रहे।
जेल मे प्रहलाद-विजय महाकाव्य, पथिक-प्रमोद, पथिक-विनोद आदि पुस्तकों की रचना
1928: मे जेल से रिहा, भरतपुर किसान आन्दोलन का नेतृत्व किया